Sound class 9 physic

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Very short Question answer for class 9

9 class physics sound numericals

1. ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगें क्यों कहते हैं?

उत्तर
क्योंकि ध्वनि में यांत्रिक ऊर्जा होती है

2. तरंग कितने प्रकार की होती हैं? उनके नाम बताएँ ।

उत्तर
तंरग दो प्रकार की होती है
(क)अनुदैर्घ्य तथा
(ख)अनुप्रस्थ

3. वायु में ध्वनि तरंगें अनुदैर्घ्य हैं या अनुप्रस्थ ?

उत्तर 
अनुदैर्ध्य तरंग

4. किसी माध्यम के कंपित कणों का माध्य स्थिति से महत्तम विस्थापन को क्या कहते हैं?

उत्तर–
तरंग का आयाम

5. क्या दो क्रमिक शीर्षो (crests) अथवा गर्ती (troughs) के बीच की दूरी को तरंग का तरंगदैर्घ्य कहते है?

उत्तर
– हाँ

6. क्या प्रकाश तरंगे अनुप्रस्थ तरंगे है?

उत्तर-
हाँ

7. किसी तरंग (जैसे ध्वनि तरंग) की चाल किन दो राशियों पर निर्भर करती है?

उत्तर-
- तरंग की आवृत्ति और उसके तरंगदैर्घ्य पर

8. एक व्यक्ति अपने मित्र के साथ चंद्रमा पर गया हुआ है। क्या वह व्यक्ति अपने मित्र द्वारा वहाँ उत्पन्न ध्वनि को सुन सकता है?

उत्तर-
नहीं

9. किसी ध्वनि तरंग की आवृत्ति तथा तरंगदैर्घ्य उसकी चाल से किस प्रकार संबंधित है?

उत्तर-
ध्वनि तरंग की चाल
= तरंगदैर्घ्य x आवृत्ति

10. आवृत्ति (frequency) और आवर्तकाल (time period) में क्या संबंध है?

उत्तर-
आवृत्ति=1/आवर्तकाल

11. क्या किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के ताप पर निर्भर करती है?

उत्तर-
हाँ

12. वायु, जल तथा लोहे में से किस माध्यम में ध्वनि के में ध्वनि की चाल सबसे तेज होती है ?

उत्तर-
लोहे में,

13. तरंग का कौन-सा गुण (i) प्रबलता और (ii) तारत्व को निर्धारित करता

उत्तर-
ध्वनि की गुणता (timber) वह अभिलक्षण है जो हमें समान तारत्व तथा प्रबलता की दो ध्वनियों में अंतर करने में मदद करता है।

14. क्या आप बता सकते हैं कि (i) सितार तथा (ii) कार का हॉर्न में से किसके द्वारा उत्पन्न ध्वनि का तारत्व अधिक है?

उत्तर-
(i) सितार की ध्वनि तरंगों का तारत्व अधिक होता है। 

15. सामान्य मानव कान के लिए श्रव्यता परास क्या है?

उत्तर-
20 Hz से 20,000 Hz तक ।

16. दिए गए ध्वनियों से संबंधित आवृत्तियों का परास (range) लिखें— (क) अवश्रव्य तरंगें तथा (ख) पराश्रव्य तरंगें।

उत्तर-
(क) 20Hz से कम आवृत्ति के तरंग अवश्रव्य तरंग कहते हैं।
(ख)20,000 Hz से अधिक आवृत्ति के तरंग पराश्रव्य तरंग कहते हैं।

17. हर्ट्ज (hertz) किस राशि का मात्रक है?

उत्तर-
आवृत्ति का

18. प्रतिध्वनि (echo) किसे कहते हैं?

उत्तर-
जब किसी स्रोत से उत्पन्न ध्वनि आगे जाकर किसी वस्तु (जैसे दीवार, पहाड़) से टकराकर पुन: स्रोत के पास वापस लौटती है तो इसे प्रतिध्वनि (echo) कहते हैं।

19. 20 Hz से कम आवृत्तिवाली ध्वनि को क्या कहते है अवश्रव्य या पराश्रव्य ध्वनि ?

उत्तर-
– अवश्रव्य

20. ध्वनि के बहुल परावर्तन (multiple reflection) के उपयोग के कोई दो उदाहरण लिखें।

उत्तर-
(1) स्टेथोस्कोप में तथा
(2) बिगुल में

21. ध्वनि की आवृत्ति 500 Hz है। आवर्तकाल का मान क्या होगा ?

उत्तर
आवर्तकाल
=1/आवृत्ति
=1/500
=0.002 सेकेंड

22. एक ध्वनि तरंग के आवर्तकाल का मान 0.01 है। ध्वनि तरंग की आवृत्ति क्या होगी ?

उत्तर -
आवृत्ति
= 1/आवर्तकाल
= 1/0.01
=100 Hz

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. अनुप्रस्थ तरंग और अनुदैर्घ्य तरंग (longitudinal wave) में क्या अंतर है? हवा (air) में ध्वनि-तरंग किस प्रकार की तरंग (wave) है?

उत्तर-
अनुप्रस्थ तरंग-
जिसमें कणों के कंपन करने की दिशा तरंग संचरण दिशा के लम्बवत होती है अनुप्रस्थ तरंग कहलाता है।
ठोस में तथा द्रव के ऊपरी सतह पर अनुप्रस्थ तरंग उत्पन्न होती हैं।
अनुदैर्ध्य तरंग-
जिसमें कणों के कंपन करने की दिशा तरंग संचरण दिशा के समांतर होती है। अनुदैर्ध्य तरंग सभी माध्यम में उत्पन्न होती हैं।

2. तरंगदैर्घ्य की परिभाषा दें। इसके मात्रक को भी लिखें।

उत्तर-
किसी तरंग-गति में वह न्यूनतम दूरी जिसपर किसी माध्यम का घनत्व (या दाब) आवर्ती रूप से अपने मान की पुनरावृति करता है, तरंग का तरंगदैर्घ्य कहा जाता है।  तरंगदैर्घ्य का SI मात्रक मीटर (m) है।

3. किसी ध्वनि-तरंग की आवृत्ति(frequency), आवर्तकाल( time period), तरंगदैर्घ्य( wave length) तथा आयाम से आप क्या समझते हैं?

उत्तर-
आवृत्ति (frequency):-
एकांक समय में दोलनों की कुल संख्या ध्वनि तरंग की आवृत्ति(frequency) कहलाती है।
आवर्तकाल(time period):-
एक दोलन पूरा करने में लगने वाला समय आवर्तकाल(time period) कहलाता है।
आयाम (amplitude) :-
 किसी माध्यम( medium) में मूल स्थिति के किसी एक ओर अधिकतम विक्षोभ के परिमाण को तरंग का आयाम( amplitude) कहते हैं।

4. किसी ध्वनि (sound) की तीव्रता और(and) प्रबलता में क्या अंतर है? समझाएँ।

उत्तर -
ध्वनि की तीव्रता -
माध्यम के किसी बिंदु पर ध्वनि की तीव्रता उसके (माध्यम के) उस बिंदु पर एकांक क्षेत्रफल से गुजरनेवाली ऊर्जा का परिमाण है।
ध्वनि की प्रबलता -
ध्वनि की प्रबलता, ध्वनि के लिए कानों की संवेदनशीलता के परिमाण की माप है। यह व्यक्तिनिष्ठ होती है।
दो ध्वनियाँ (sounds) समान तीव्रता की हो सकती हैं, परंतु हम एक को दूसरे की तुलना में अधिक प्रबल ध्वनि के रूप में सुन सकते हैं, क्योंकि हमारे कान इसके लिए अधिक संवेदनशील (sensetive) हैं।

5. किसी मोटरगाड़ी के निकट पहुँचने के पहले ही उसके हॉर्न (horn) की आवाज क्यों सुनाई पड़ जाती है ?

उत्तर-
ध्वनि की चाल, मोटरगाड़ी की चाल से बहुत ही अधिक होती है। जिसके कारण मोटरगाड़ी के निकट पहुँचने के पहले ही उसके हॉर्न (horn) की आवाज सुनाई पड़ जाती है

6. ध्वनि-तरंगों (sound waves) की प्रकृति अनुदैर्घ्य (longitudinal) क्यों है ?

उत्तर-
अनुदैर्घ्य तरंगों में माध्यम के कणों का विस्थापन विक्षोभ के संचरण की दिशा के समांतर होता है। माध्यम के कण एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति नहीं करते, परंतु अपनी विरामावस्था से आगे-पीछे दोलन करते हैं। ध्वनि तरंगें ठीक इसी प्रकार संचरित होती हैं। इसलिए, ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें हैं ।

7. आपका एक मित्र ( friend) एक अंधेरे(dark) कमरे में बैठा है। ध्वनि का कौन-सा अभिलक्षण आपको कमरे के बाहर से ही उसकी आवाज (sound) पहचानने में मदद करता है?

उत्तर-
एक मित्र एक अंधेरे कमरे में बैठा है तो ध्वनि का तारत्व कमरे के बाहर से ही हमें अपने मित्र की आवाज को पहचानने में मदद करता है।

8. एक परावर्तक सतह ( surface)के सामने एक ध्वनि-स्रोत रखने पर "उससे उत्पन्न ध्वनि ( sound) की प्रतिध्वनि सुनाई देती है। यदि ध्वनि-स्रोत और परावर्तक सतह के बीच की दूरी( distance) नियत रहे तो किस दिन (day) प्रतिध्वनि अधिक जल्दी सुनाई पड़ेगी ?
(क) जिस दिन(day) ताप (temperature) कम होगा
(ख) जिस दिन( day) ताप अधिक होगा।

उत्तर-
(ख) जिस दिन ताप (temprature) अधिक होगा।

9. वैसे तो आकाश में तड़ित (बिजली) की चमक तथा मेघगर्जन साथ-ही-साथ उत्पन्न होते हैं, परंतु चमक पहले दिखाई पड़ती है और मेघगर्जन कुछ समय बाद। क्यों?

उत्तर-
बिजली की चमक प्रकाश की चाल (3 x 10³ m/s) से चलकर प्रेक्षक की आँखों तक पहुँचती है जबकि मेघगर्जन (कड़क) ध्वनि की चाल (330m/s) से चलकर प्रेक्षक के कानों तक पहुँचती है। इसलिए, प्रकाश (चमक) को प्रेक्षक तक पहुँचने में कम समय लगता है ।

10. क्या ध्वनि परावर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका प्रकाश तरंगें करती हैं? इन नियमों को लिखें।

उत्तर-
हाँ, ध्वनि भी प्रवर्तन के उन्हीं नियमों का पालन करती है जिनका कि तरंगें करती हैं । ये नियम इस प्रकार हैं -
(i) आपतित ध्वनि तरंग, परावर्तित ध्वनि तरंग और आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब, तीनों एक ही ताल में होते हैं ।
(ii) ध्वनि के आपतन का कोण और ध्वनि के परावर्तन का कोण बराबर होते हैं।

11. ध्वनि तरंगों के परावर्तन के दो व्यावहारिक उपयोगों का उल्लेख करें।

उत्तर-
(1) पराध्वनि संसूचक एक ऐसा यंत्र है जो पराध्वनि तरंगों का उपयोग करके मानव शरीर के आतंरिक अंगों ( internal organs)का प्रतिबिंब प्राप्त करने लिए काम में लाया जाता है।
( 2) पराध्वनि का उपयोग(use) गुर्दे की छोटी(small) पथरी को बारीक कणों में तोड़ने (broken)के लिए भी किया जा सकता है।

12. प्रतिध्वनि (echo) किसे कहते हैं? यह कब सुनाई पड़ती है?

उत्तर-
जब किसी स्रोत से उत्पन्न ध्वनि आगे जाकर किसी वस्तु (जैसे दीवार, पहाड़) से टकराकर पुन: स्रोत के पास वापस लौटती है तो इसे प्रतिध्वनि (echo) कहते हैं। वस्तुत: यह ध्वनि के परावर्तन का परिणाम है जो कुछ देर बात स्रोत के पास वापस पहुंच जाती है। उदाहरण के लिये कुंएँ में आवाज लगाने पर अपनी ही आवाज थोड़ी देर बाद सुनाई पड़ती है।

13. छोटे कमरे में प्रतिध्वनि क्यों नहीं सुनाई पड़ती है?

उत्तर-
एक छोटे(small) से कमरे (room) में प्रतिध्वनि नहीं सुना जा सकता है क्योंकि मूल से ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के बीच का समय अंतराल मनुष्य (man) के लिए महसूस करने के लिए बहुत छोटा है। एक छोटे से कमरे में प्रतिध्वनि सुनने के लिए आवश्यक न्यूनतम दूरी 17.2 मीटर से कम है।

14. श्रुतिनिर्बंध (persistence of sound) किसे कहते हैं और इसका मान कितना होता है?

उत्तर-
मनुष्य द्वारा सुनी गयी ध्वनि का प्रभाव उसके मस्तिष्क में लगभग 1/15 s तक रहता है। इसे श्रुतिनिर्बंध कहते हैं।

15. अनुरणन से क्या समझते हैं? इसे किस प्रकार कम किया क जाता है?

उत्तर-
यदि परावर्तन-पृष्ठ एक-दूसरे के बहुत निकट होते हैं तो प्रतिध्वनियाँ अलग-अलग सुनायी नहीं देती हैं, बल्कि वे एक-दूसरे से मिलकर एक सुरीली ध्वनि उत्पन्न करती है। इसका प्रभाव कान पर अधिक समय तक रहता है। इसको अनुरणन कहते हैं।

16. पराश्रव्य तरंगों का उपयोग (use) वस्तुओं को साफ करने में कैसे किया जाता है?

उत्तर-
पराश्रव्य तरंगों का उपयोग वस्तुओं के उन भागों को साफ़ करने में किया जाता है जिन तक पहुँचना कठिन होता है— जैसे सर्पिलाकार नली, इत्यादि । जिन वस्तुओं को साफ करना होता है उन्हें साफ करनेवाले घोल में रखा जाता है और इस घोल में पराश्रव्य तरंगें भेजी जाती हैं। इन तरंगों की उच्च आवृत्ति के कारण धूल, गंदगी के कण तथा चिकने पदार्थ (greasy material) अलग होकर नीचे गिर जाते हैं और वस्तु पूरी तरह साफ हो जाती है।

17. कंसर्ट हाल (या बड़े सभा भवन) में हॉल (या सभा भवन) की छतें वक्राकार क्यों होती हैं ?

उत्तर-
कंसर्ट-हॉल की छतें वक्राकार होती हैं ताकि ध्वनि तरंगों (sound waves) के परावर्तन के पश्चात् हॉल के सभी कोनों तक पहुँच सके।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. ध्वनि क्या है( what is sound) और यह कैसे उत्पन्न होती है?

उत्तर-
ध्वनि (sound) उर्जा (energy)का एक रूप है अर्थात ध्वनि(sound) एक प्रकार की उर्जा है। ध्वनि(sound) हमारे कानों में एक प्रकार की संवेदना उत्पन्न करती है, जिससे हम ध्वनि(sound) को सुन पाते हैं। उर्जा संरक्षण नियम के अनुसार उर्जा को न ही बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, केवल उर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरण किया जा सकता है। अत: ध्वनि उर्जा(sound energy) को भी दूसरे उर्जा के रूप को रूपांतरण कर प्राप्त किया जाता है। किसी वस्तु के कंपन से ध्वनि(sound) उत्पन्न होती है। अर्थात जब भी किसी वस्तु को कंपित किया जाता है, तो ध्वनि उत्पन्न होती है।
उदाहरण:
(a) जब पेड़ के पत्तों से हवा(air) गुजरती है, तो पत्ते तेजी से हिलने लगते हैं, अर्थात कंपित होने लगते हैं। पत्तों के कंपन से सरसराहट की ध्वनि(sound) उत्पन्न होती है।

2. एक स्वच्छ चित्र की सहायता से बताएँ कि ध्वनि के स्रोत के निकट की वायु में संपीडन (compression) तथा विरलन (rarefaction) कैसे उत्पन्न होते हैं ?

उत्तर:-
 जब किसी वस्तु से ध्वनि(sound) उत्पन्न होती है तो कंपन से लगे बल(sound) के कारण उसके निकट की वायु के कण एक दूसरे के नजदीक आ जाते हैं। कणों की ऐसी स्थिति को संपीड़न कहते हैं। उसके बाद आगे के कणों का संपीड़न होता है और पहले वाले कण एक दूसरे से दूर चले जाते हैं। इस तरह से पहले वाले कणों (particals) का विरलन होता है। संपीड़न और विरलन के क्षेत्र एक के बाद एक पैदा होते रहते हैं। संपीड़न और विरलण की ऋंखला बन जाती है जिससे होकर ध्वनि(sound) तरंगे आगे बढ़ती हैं।

3. ध्वनि(sound) की प्रबलता से आप क्या समझते हैं? यह किन-किन कारकों पर निर्भर करती है?

उत्तर-
ध्वनि की प्रबलता ध्वनि(sound) के आयाम पर निर्भर करती है। ऐसी ध्वनि को जिसमें अधिक ऊर्जा(energy) होती है, उसकी प्रबलता कहते हैं अर्थात् इकाई क्षेत्र( area) से 1 सेकण्ड में गुजरने वाली ध्वनि(sound) को प्रबलता कहते हैं। कारक- यह निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती है (i) आयाम पर (ii) ऊर्जा पर(iii) तीव्रता पर (iv) तरंग(wave) के वेग पर।

4. ध्वनि - संचरण के लिए एक द्रव्यात्मक माध्यम आवश्यकता होती है— इसे एक प्रयोग द्वारा बताएँ । अथवा, की ध्वनि(sound) निर्वात( में गमन नहीं कर सकती है। इसे दिखाने के लिए एक प्रयोग का वर्णन करें।

उत्तर-
ध्वनि एक यांत्रिक तरंग(mechanical wave) है जिसके संचरण के लिए किसी माध्यम- वायु(air), जल(water), स्टील(steel) आदि की आवश्यकता होती है। इसका संचरण निर्वात में नहीं हो सकता। प्रयोग: 1) एक बेलजार में विद्युत् घंटी(electric bell) को वायुरुद्ध रबड़ के साथ बेलजार के ढ़क्कन पर बाँधकर लटकाएँ। 2) बेलजार को निर्वात पम्प(pump) के साथ जोड़ें। 3) घंटी के स्विच(switch) को दबाएँ। 4) अभी घंटी की आवाज़(sound) सुनाई देगी क्योंकि बेलजार में अभी हवा(air) है। 5) अब निर्वात पम्प(pump) को चलाएँ। 6) अब धीरे-धीरे बेलजार से निर्वात पम्प द्वारा हवा(air) निकली जा रही है। 7) अब घंटी(bell) की आवाज़ धीमी होती जा रही है। 8) और धीरे-धीरे हवा(air) की अनुपस्थिति में घंटी की आवाज़(sound) सुनाई नहीं देगी।

5. समतल सतह से ध्वनि(sound) के परावर्तन(reflection) को दिखाने के लिए एक प्रयोग का वर्णन करें।

उत्तर:-
टेबुल(table) पर लकड़ी का एक समतल तख्ता AB सीधा खड़ा किया जाता है| लगभग 1 मीटर लंबी और 5 सेमी ० व्यास की दो नलियाँ ली जाती है| इनमें एक नली को टेबुल(table) पर इस प्रकार रखा जाता है कि इसका अक्ष तख्ते के बिंदु पर कुछ कोण बनाये| इस नली के मुंह पर एक टेबुल घड़ी रख दी जाती है| अब दूसरी नली को टेबुल पर इस प्रकार रखा जाता है कि उसका अक्ष पर भी तख्ते के बिंदु पर मिले| इस नली के मुंह पर कान लगा दिया जाता है| घड़ी की टीक टीक की ध्वनि सीधे कान तक नहीं पहुंचे, इसके लिए दोनों नलियों के बीच लकड़ी का एक पर्दा खड़ा कर दिया जाता है और उसपर पानी से भिगोया मोटा कपड़ा लपेट दिया जाता है| अब दूसरी नली को परित: घुमाकर उसे उस स्थान पर रखा जाता है जहाँ स्पष्ट ध्वनि सुनायीं पड़ती है| इससे यह पता चलता है कि घड़ी की ध्वनि(sound) पहली नली के भीतर से होकर चलते हुए लकड़ी के समतल तख्ता से टकराती है और वहाँ से परावर्तित (reflection) होकर दूसरी नली के भीतर से चलती हुयी कान तक पहुँचती है| ऐसी स्थिति में यह पाया जाता है कि------ अर्थात, आपतन कोण( Angle of incident) =परावर्तन कोण ( Angle of reflection) दोनों के अक्षर (जो आपतित ध्वनि की दिशा और परिवर्तित ध्वनि( reflected sound) की दिशा को दर्शाते हैं) और आपतन बिंदु( incident point) पर लकड़ी के तख्ते पर डाला गया अभिलंब तीनों एक ही समतल में है।

6. बताएँ कि किसी धातु (Mattel) के बरतन (या टुकड़ों) में दोषों का पता लगाने के लिए पराश्रव्य तरंगों(waves) का उपयोग किस प्रकार किया जाता है ?

उत्तर:-
पराश्रव्य तरंगों(waves) का उपयोग धातुओं के पिंडों के भीतर बारीक दरारों या छिद्रों का पता लगाने में किया जा सकता है| धातु के टुकड़ों का उपयोग पुलों, बड़े बड़े भवनों(buildings), मशीनों(machine) तथा वैज्ञानिक उपकरणों को बनाने में किया जाता है| यदि व्यवहार में लाये गए धातु के टुकड़ों के अंदर ऐसे दरार या छिद्र रहेंगे तो वे पुल या भवनों की संरचना(construction) की मजबूती को कम कर देंगे| ऐसे दोष बाहर से दिखायी नहीं पड़ते हैं| ऐसे दोषों का पता लगाने के लिए पराश्रव्य तरंगों(waves) का उपयोग किया जाता है| पराश्रव्य तरंगें धातु के पिंडों से होकर गुजारी जाती है| यदि कोई दरार या छिद्र तरंगों के पथ में नहीं है तो ये तरंगें सीधे निकल जाती है, परन्तु यदि कोई दोष होता है तो पराध्वनि तरंगें परावर्तित हो जाती है| प्रेषित तरंगों का पता लगाने के लिए धातु के दूसरी ओर एक संसूचक रखा जाता है जो उनमें दोष की उपस्थिति को दर्शाती है| इस प्रकार प्रतिध्वनिक मापन विधि से किसी पिंड में दरारों (या छिद्रों) की सही स्थिति ज्ञात की जाती है| साधारण ध्वनि(sound) का उपयोग हम ऐसे कार्यों के लिए क्यों नहीं कर सकते? इसका कारण यह है कि साधारण ध्वनि दरारों या छिद्रों के स्थान(place) के कोनों(ears) से मुड़कर संसूचक तक पहुँच जाती है|

7. बताएँ कि चमगादड़ हवा(air) में अपने शिकार को पकड़ने के अर्थात लिए पराश्रव्य तरंगों(waves) का उपयोग किस प्रकार करता है?

उत्तर:-
चमगादड़ों की आंखें(eyes) कमजोर होती है, इसलिए वे अपना शिकार देख नहीं पाते| अपनी उड़ान के दौरान वे उच्च आवृत्ति(high frequency) वाली पराश्रव्य तरंगें(waves) छोड़ते हैं| ये तरंगें अवरोध या शिकार द्वारा परावर्तित(reflected) होकर चमगादड़ के कान तक वापस पहुँचती है| इस परावर्तित तरंगों(waves) की प्रकृति(nature) से चमगादड़ अवरोध या शिकार की स्थिति व आकार जान जाते हैं।

8. सोनार की कार्यविधि तथा इसके विभिन्न उपयोगों का वर्णन करें।

उत्तर:-
सोनार (SONAR) एक ऐसी युक्ति है जिसे जल(water) में स्थित पिंडों की दूरी(distance), दिशा(direction) तथा चाल(speed) मापने के लिए किया जाता है| सोनार में एक प्रेषित तथा एक संसूचक होता है| प्रेषित पराध्वनि उतपन्न व प्रेषित करता है, ये तरंगें(waves) जल में चलती है तथा जल तल से टकराकर संसूचक द्वारा ग्रहण कर ली जाती है| संसूचक पराध्वनि तरंगों को विद्युत(electric waves) संकेतों में बदल देता| जिसकी उचित व्याख्या करके अनेक चीजों की जानकारी हासिल की जाती है| सोनार का उपयोग (Uses of SONAR) ----- सोनार का उपयोग(Uses of SONAR) समुद्र की गहराई ज्ञात करने में किया जाता है| सोनार का उपयोग(Uses of SONAR) जल के अंदर स्थित चट्टानों या घाटियों को ज्ञात करने में किया जाता है| सोनार का उपयोग(Uses of SONAR) डूबी हुई बर्फ या डूबे हुए जहाज आदि की जानकारी प्राप्त करने में किया जाता है|

9. मानव कान (human ear) के कार्यविधि को समझाकर लिखें।

उत्तर-
हमारा बाह्य कर्ण(external ear) आस पास की ध्वनियाँ( sounds) ग्रहण करता है| यह ध्वनि फिर श्रवण तंत्रिका से गुजरती है| श्रवण तंत्रिका के अंत में एक पतली झिल्ली होती है, जिसे कान का पर्दा या कर्णपट्ट कहते हैं| जब वस्तु में उत्पन्न विक्षोभ के द्वारा माध्यम(medium) का संपीड़न कर्णपट्ट तक पहुँचता है, तो ये कर्णपट्ट को अंदर की ओर धकेलता है| इसी प्रकार, विरलन कर्णपट्ट को बाहर की ओर खींचता है| इस प्रकार कर्णपट्ट में कंपन(vibration) उत्पन्न होता है| ये कंपन मध्यवर्ती कान में स्थित तीन हड्डियों (हथौड़ा, निघात और वलयक) की सहायता से कयी गुना प्रवर्धित किया जाता है| फिर ये प्रवर्धित दबाव(presure) कर्णावर्त के द्वारा विद्युत संकेतों में परिवर्तित किया जाता है| फिर श्रवण नाड़ी के द्वारा ये विद्युत संकेत(electric signal) मस्तिष्क तक पहुँचते हैं और मस्तिष्क इन्हें ध्वनि के रूप में परिवर्तित(reflected) करता है|