द्वाविंशतिः पाठः
प्रियं भारतम्रा

जतां मे मनसि नः प्रियं भारतम् ।
द्योतितं तत्स्वरूपं लसतु शाश्वतम्।।
मेखला विन्ध्यगोदावरी-जाह्नवी
मस्तकं हिमगिरिः सागरो नूपुरम् ॥
राजतांमे .......
शब्दार्थ-राजतां = विद्यमान । मे = मेरे । मनसि = मन में। नः = हमारा। द्योतितं = . प्रकाशित । तत्स्वरूपं = उसका रूप। लसतु = शोभायमान । मेखला = घेरा, कमरबन्द। जाह्नवी = गंगा । नूपुरम् = पैंजनी।
अर्थ-मेरे मन में हमेशा हमारा प्रिय भारत विद्यमान रहे। उसका स्वरूप सदैव चमकता रहे। विन्ध्याचल कटि है और गोदावरी तथा गंगा उसके कमरबन्द की तरह हैं, जिसका मस्तक हिमालय जैसा गर्वोन्नत है और जिसके पाँव सागर पखार रहे हैं, वह भारत हमारा प्रिय है।
शिविदधीचिप्रभृतिभिस्तथा सेवितम्
चन्द्रशेखर-भगतसिंह-विस्मिल प्रियम् ।
गान्धिना यत् प्रदत्तं स्वकं जीवनम्
प्राणसर्वस्वदानैः कृतार्थीकृतम् ॥
राजतांमे .........
शब्दार्थ-शिवि = जिन्होंने सामान्य बाज पक्षी की प्राण-रक्षा के लिए अपने शरीर का सारा मांस तुला (तराजू) पर चढ़ा दिया था। दधीचि = जिन्होंने देवासुर संग्राम में अस्त्र निर्माण हेतु अपनी हड्डी दे दी थी। प्रदत्तं = अर्पित । स्वकं = अपना । कृतार्थीकृतम् = कृतार्थ किया।
अर्थ-वह देश जहाँ शिवि तथा दधीचि जैसे दानी हुए हैं तथा चन्द्रशेखर, भगतसिंह एवं विस्मिल जैसे लोगों ने इसकी अस्मिता की रक्षा के लिए अपनी कुर्बानी दी है। जिस देश के लिए गाँधी ने अपना जीवन समर्पित कर दिया तथा अपने प्राण देकर अपने जीवन को कृतार्थ किया। वह प्रिय भारत सदैव हमारे मन विराजमान रहे।
स्वन्दर्शि-प्रजातन्त्र-सम्पोषकम्
विश्वनेतृप्रियं नेहरूपण्डितम् ।
शास्त्रि राजेन्द्र-अब्दुलहमीदादिकम्
पुत्रजातं च लब्ध्वातिदर्यान्वितम् ॥
राजतां मे .......
शब्दार्थ-सम्पोषकम् = समर्थक । विश्वनेतृप्रियं = संसार के प्रिय नेता । जातं = जन्म लेकर । लब्ध्व = प्राप्त किया। दन्वितम् = गौरव।
अर्थ-स्वप्नदर्शीप्रजातंत्र के समर्थक, विश्व के प्रिय नेता पंडित जवाहर लाल, लाल बहादुर शास्त्री, राजेन्द्र प्रसाद, अब्दुल हमीद आदि जैसे महापुरुषों ने जन्म लेकर भारत का सिर ऊँचा किया। वह प्रिय भारत सदैव मेरे मन में विराजमान रहे।
सैन्यदाक्ष्यञ्च विज्ञानप्रौद्योगिकीम्
विस्तृता कर्तुमग्रेसरं यत् सदा।
राष्ट्रचिन्तापरं श्रमपरं दिवानिशम
हर्षितं वीक्ष्य सर्वत्र मोदान्वितम् ।
राजतां मे .......
शब्दार्थ-सैन्यदाक्ष्यं = सैन्य दक्षता। प्रौद्योगिकीम् = उद्योग संबंधी। विस्तृतां = विस्तार, वृद्धि करने में । अग्रेसरं = अग्रणी । श्रमपरं = कार्य में संलग्न । दिवानिशम् = दिनरात। हर्षितं = प्रसन्न । वीक्ष्य = देखकर । सर्वत्र = सभी ओर । मोदान्वितम् = आनन्दित ।
अर्थ-सैन्यदक्षता, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विकास करने की ओर अग्रसर रहने वाले जहाँ के लोग श्रेष्ठ राष्ट्र का चिन्तन करते हैं। जहाँ के लोग दिन-रात परिश्रम करके देश को खुशहाल देखना चाहते हैं, वह भारत मेरे मन में हमेशा आनन्द उत्पन्न करता रहे।

अभ्यासः
प्रश्न एवं उनके उत्तर

प्रश्न1. भारतं कां विद्यां विस्तृतां कर्तुम् अग्रेसरं वर्तते ?
उत्तर- भारतं सैन्यदक्षतां. विज्ञान-प्रौद्योगिकम् च क्षेत्रे विस्तृतां कर्तुम् अग्रेसरं वर्तते ?
प्रश्न 2. महात्मा गांधी किं कृत्वा स्वजीवनं कृतार्थी कृतवान् ?
उत्तर-महात्मागान्धिनः सप्राणं सर्वस्वं दानं कृत्वा स्वजीवनं कृतार्थी कृतवान्।
प्रश्न 3. भारतस्य मेखला: के सन्ति ?
उत्तर-भारतस्यमेमेखलाः न्ध्यपर्वतः गोदावरी गंगा च आदयः नद्यः सन्ति ।।