त्रयोदशः पाठः
शुकेश्वराष्टकम्

सनातनं पुरातनं परोपकार-साधनम्,
जनस्य कामपूरकं मनोजगर्वखर्वकम्।
शुकेश्वरं नमाम्यहं शुकेश्वरं नमाम्यहम्,
शुकेश्वरं नमाम्यहं शुकेश्वरं नमाम्यहम् ॥
शब्दार्थ-सनातनं = आदिकाल से। पुरातनं = प्राचीन काल से। परोपकार = दूसरों की मदद करना। साधनम् = साधन । जनस्य = लोगों के । कामपूरकं = कामना, पूर्ण करने वाले। मनोज = कामदेव। गर्व = अहंकार । खर्वकम् = नष्ट करने वाले। शुकेश्वरं = शुकेश्वर महादेव को। नमाम्यहं = नमस्कार करता हूँ।
अर्थ-आदिकाल से परोपकार को महान साधन मानने वाले लोगों की मनोकामनाएँ पूरी करने वाले तथा कामदेव के अहंकार को चूर करने वाले शुकेश्वर महादेव को बारबार नमस्कार (प्रणाम) है।
2. जगत्तमोविनाशकं सदाऽव्ययप्रदायकम्,
सदाशयं सहायकं सदाशिवं सुनायकम् ।
शुकेश्वरं ......
शब्दार्थ-जगत्तमो विनाशकं = संसार रूपी अज्ञान को विनाश करने वाले । सदा = हमेशा । अव्यय प्रदायकम् = अक्षरता को प्रदान करने वाले। सदाशयं = सत्याचरण करने वालों। सहायकं = के सहायक।
अर्थ-सांसारिक अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करने वाले, सदैव अक्षयता प्रदान करने वाले सत्य आचरण पर चलने के लिए प्रेरित करने वाले सदाशिव सुनायक शुकेश्वर महादेव को बार-बार नमस्कार है। ..
3 सतां सदा सुरक्षकं,
दुराशयप्रबाधकम् 
भजन्मनोविहारिणं
सदारिवृन्दपीडकम् ।
शुक्रेश्वरं .....
शब्दार्थ-सतां = सज्जनों को। सुरक्षकं = सुरक्षा करने वाले। दुराशय = दूषित विचारों को। प्रबाधकम् = बाधा पहुँचाने वाले । भजन्मनोविहारिणं = भक्तों के मन में विहार कर' वाले । अरिवृन्दपीडकम् = दुश्मनों को पीड़ा पहुँचानेवाले। ..
अर्थ-सज्जनों को सदैव सुरक्षा प्रदान करने, दृषित विचारों को नष्ट करने वाले, भक्तों न में गदैव विहार करने वाले तथा सदैव शत्रुसमूह को पीड़ा पहुँचाने वाले उस शुकेश्वर महादेव को बार-बार मस्कार है।
4. पापतिं सतीपति,
नमामि तं महागतिम् ।
नमामि कालिकापति,
नमामि तारिकापतिम् ।
शुकेश्वरं .....
शब्दार्थ-उमापतिं = महादेव को। नमामि = नमस्कार करता हूँ। तं = उनको। महागतिम = भवसागर से पार उतारने वाले को ।
अर्थ-उमापति सतीपति भवसागर से पार उतारने उस महादेव को नमस्कार करता . हूँ। कालिकापति तारिकापति भगवान शुकेश्वर महादेव को नमस्कार करता हूँ।
5. जटायुतं त्रिलोचनं त्रिमार्गगामस्तकं
गजस्य चर्मधारिणं त्रिशूलशस्त्रधारिणम् ।
शुकेश्वरं .....
शब्दार्थ-जटायतुं = जटा से युक्त, जटाधारी। त्रिलोचनं = तीन आँखों वाले। त्रिमार्गगार्द मस्तकम् = गंगाजल से भींगा सिर वाले। गजस्य = हाथी के। चर्मधारिणं = चमड़ा धारण करने वाले।
अर्थ-उस शुकेश्वर महादेव को बार-बार प्रणाम करता हूँ जो जटा से युक्त तीन आँखों वाले हैं तथा जिनके सिर सदा गंगाजल से गीला रहता है तथा जिनका वस्त्र गजचर्म है और हाथ में त्रिशूल धारण किए हुए हैं।
6. नवेन्दुना सुभोभितं
सुदिव्यपुष्पपूजितम्।
मयूरगीततोषितं,
सुभक्तिगीतकीर्तितम् ।
शुकेश्वरं ......
शब्दार्थ-नव = नया। इन्दुना = चंद्रमा से। सुशोभितं = शोभायमान । सुदिव्यपुष्पपूजितम् = सुन्दर तथा अलौकिक फूलों से पूजे जानेवाले। तोषितं = प्रसन्न होने वाले। भक्तिगीतकीर्तिकम् = सच्ची भक्ति पर प्रसन्न होने वाले।
अर्थ-द्वितीया के चन्द्रमा से शोभायमान सुन्दर दिव्य फूलों से पूज्य, मयूर गीत से प्रसन्न होनेवाले तथा भक्तों की पुकार सुनने वाले शुकेश्वर महादेव को नमस्कार है।
7. जलप्रियं महेश्वरं
कृषः फलप्रदायकम्
जनेश्वरं शुकेश्वरं,
सुभूमिनित्पालकम् ।
शुकेश्वरं .....
शब्दार्थ-जलप्रियं = जल के प्रिय। फलप्रदायकम् = फल प्रदान करने वाले। जनेश्वरं = लोगों के स्वामी । सुभूमिनित्यपालकम् = सद्पात्रों के पालन करने वाले।
अर्थ जगत के स्वामी शुकेश्वर महादेव जलदाता कृषि में फल देने वाले सदपात्रों के पालन करने वाले हैं, उस महेश्वर शुकेश्वर को बार-बार नमस्कार है।
8. सुबोधदं सुभक्तिदं
सुभुक्तिमुक्तिदायकम्
चतुष्फलप्रदायकं,
विशालरूपधारकम्
। शुकेश्वरं .....
शब्दार्थ-सबोधदं = सदज्ञान प्रदाता। सुभक्तिदं = सच्ची भक्ति प्रदान करने वाले। सभूक्तिमुक्तिदायकम् = सुख एवं मोक्ष देने वाले। चतुष्फलदायकम् = चारों फल (धर्म - अर्थ, काम, मोक्ष) देनेवाले । विशालरूपधारकम् = विशाल रूप धारण करनेवाले।
अर्थ-शुकेश्वर महादेव सद्ज्ञान, सद्भक्ति, सुख एवं मोक्ष प्रदान करने वाले हैं। धर्म अर्थ, काम, मोक्ष चारों फल प्रदाता विकराल रूप धारण करने वाले शुकेश्वर महादेव को नमस्कार करता हूँ।
9. इदं शुकेश्वराष्टकं
तु वैद्यनाथकीर्तितम्
पठन्नरः सभक्ति यः,
शिवो ददाति वाञ्छितम् ।
शुकेश्वरं ..
शब्दार्थ-इदं = यह । तु= तो । वैद्यनाथकीर्तितम् = वैद्यनाथ द्वारा रचा गया। पठन्नरः = मनुष्य पढ़ता है। यः = जो। सभक्ति = श्रद्धापूर्वक । ददाति = देते हैं। वाञ्छितम् = इच्छानुकूल।
अर्थ-बैद्यनाथ द्वारा रचा गया यह शुकेश्वर अष्टक जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक गाता है, उसे शुकेश्वर महादेव इच्छानुकूल मनोकामनाएं पूरी करते है। अतएव शुकेश्वर को बारबार नमस्कार है।

अभ्यासः
प्रश्न एवं उनके उत्तर


प्रश्न 1. "मनोजगर्वखर्वकः'' कः?
उत्तर-भगवान शंकरः मनोजगर्वखर्वकः अस्ति।
प्रश्न 2. अस्य पाठस्य सरलार्थ लिखत्।
उत्तर-पाठ का अर्थ देखें और सभी को एक साथ लिख लें।